Jin Shasan Tej Badhaiya Re
यह सांस्कृतिक और परंपरागत गीत है। A cultural and traditional song. जिन शासन तेज बढ़ाया रे (लय : कैसी वह कोमल काया रे…) जिन-शासन तेज बढ़ाया रे, तीर्थंकर भगवान, हे कल्पवृक्ष की छाया रे, तीर्थंकर भगवान, कितनों को पार लगाया रे, तीर्थंकर भगवान। अर्हत् है महिमा शाली, प्रवचन की छटा निराली, द्वादश गुण रूप कहाया […]
