भगवान नेमिनाथ की बारात
(लय : चांदी की दीवार)
शादी करने आये नेमजी कांकड़ डोरा तोड़ दिया
तोरण पर आकर प्रभु ने रथ का मुखड़ा मोड़ दिया
हाथी, घोड़े, रथ पैदल बारात बड़ी ही भारी थी
श्याम सलौने नेम कंवर की छवि बड़ी ही प्यारी थी
छप्पन कोड़ी आये बाराती यह तो सब से न्यारी थी
मन ही मन राजुल मुस्कायी प्रभु नाता जोड़ लिया ॥१ ॥
देवी देवता देखण आये, मन ही मन मुस्काय रहें भोजन होगा पशुओं का, तीर्थंकर इसको कैसे सहे रो रोकर अपनी भाषा में, पशु प्रभु से बात कहे पशुओं की पुकार सुनी, तो जग से नाता तोड़ लिया ॥२ ॥
पूछा राजुल ने जिनवर से, मेरा दोष क्या है बतलाओ प्रीत लगा कर प्रियतमजी मत, मुझ दुःखिया कोठुकराओ तोरण से रथ को मोड़ा हे, नाथ मुझे तुम समझाओ
क्या कमी है मुझमे जो मेरा प्यार भरा दिल तोड़ दिया ॥३ ॥
आठ भवों की प्रीत पुरानी, मैं तो निभाने आया था
यह दुनियां दुःख का सागर है, यही बताने आया था सच्चा मार्ग संयम का है यही बताने आया था
इसी लिये रथ को मोड़ा मुक्ति से नाता जोड़ लिया ॥४