Tapasya (तपस्या)

Adhyatmik, Nirgun, Vairagy

1. Is Bhav Me Jo Na Mile 2. Chala Jata Hai Ek Din Aadmi 3. Nahi Chahiye Dil Dukhana Kisi Ka

इस भव में जो न मिले (तर्ज : बस यही अपराध हर बार करता हूँ) इस भव में जो ना मिलें, परभव में मिलता है ,अपने-अपने कर्मों का, फल सबको मिलता है।। है वो भाई, दोनों ही तो, दुनियाँ के मेले में,  एक दर दर का भिखारी, दूजा महलों में,  होते पैदा एक से, नहीं […]

Adhyatmik, Nirgun, Vairagy

Suraj Ki Garmin Se Tapte Hue

सूरज तपे तपे रे माटी सूरज तपे तपे रे माटी, दीपक जले जले रे बाती तुझको तपना होगा, तुझको तपना होगा तप ही तो माटी को गागर बनाये गागर में सागर सहज ही समाये माटी का अर्पण, समर्पण जब होगा मुक्ति का अर्पण, वरण तब ही होगा। तुमको……. तपअग्नि के तप से, तू हो जारे

Adhyatmik, Nirgun, Vairagy

Ab Lagale Lagan

अब लगाले लगन (तर्ज तुम से लागी लगन ……) अब लगाले लगन, कर प्रभु का भजन,  चेत प्राणी। बीती जाय तेरी जिन्दगानी। । टेक ।। किसको कहता है पगले तू अपना,  यह तो संसार का झूठा सपना। है न कोई सगा, आखिर देंगे दगा, बहता पानी ।। बीती जाय तेरी जिन्दगानी । ।। ।। यह

Adhyatmik, Nirgun, Vairagy

1, Tora Man Darpankahlaye, Obhatke Hue Insan

ओ भटके हुए इंसान (तर्ज: ऐ मेरे दिले नादान ….) ओ भटके हुए इन्सान, प्रभु शरण चले आना।  हो जाए सफल जीवन, घबराये क्यों दीवाना ।।  दो दिन की जिन्दगी को, क्या यूँ ही गँवाएगा।  आयेगा काल सिर पर, नहीं कोई बचाएगा।  मतलब का जमाना है, तूने ये नहीं जाना।।  सुख और दुःख जीवन में,

Adhyatmik, Kabir, Satsang, Vairagy

Uth Jag Musafir Bhor Bhayi

1 उठ जाग मुसाफिर उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो सोवत है। जो सोवत है सो खोवत है, जो जागत है सो पावत है॥ उठ नींद से अखियां खोल जरा,  और अपने प्रभु से ध्यान लगा।  यह प्रीत करन की रीत नहीं,  प्रभु जागत है, तू सोवत है। उठ जाग मुसाफिर… जो

Guru, Mahashraman

Shree Mahashraman Charno Me

महाश्रमण स्तुति  श्री महाश्रमण चरणों मे (लय : प्रभु पार्श्व देव चरणों में) श्री महाश्रमण चरणों में, श्रद्धा उपहार है।  जिनके मुख दर्शन से ही होता उद्धार है।। 1. है सहज शांति की मूरत, मुख पर मुस्कान है।  शब्दों से अधिक भावों को, देते आकार है।। 2. बाहर में जी कर करते, आत्मा में वास

Mahapragya

Mousam Hai Suhano Ujali Bhor

महाप्रज्ञजी (जन्मोत्सव) मौसम है सुहाणो उजली भोर न्हायो हैरोशनी  में गांव टमकोर  तोलामल जी तात निहाल-2 जननी बालू जी खुशहाल पा सुत कालजिय री कोर  लियो दिव्य ज्योति अवतार  स्वागत करे सकल संसार जन समदर म हर्ष हिलोर  मिल्यो विश्व न दिव्य प्रकाश  मैत्री करुणा रो आश्वास विरल अहिंसा यावा दोर  महाप्रज्ञ रो जन्मोत्सव आध्यात्मिक

Tapsya

Tapsya Ki Aayi Hai Bahar Ji Badhayi Hove

तपस्या की आई है बहार जी -2बधाई होवै जीवन का पाते वो ही सार-2बधाई होवै धन्य तपस्वी उत्तम प्राणी-2  तपस्या से करे भवपार -2 जी बधाई-2 होवे तपस्या के बारह भेद बताये-2  करले जो शक्ति अनुसार -2जी बधाई होवै कर्म खपाने का मार्ग तपस्या -2  महिमा है तप की अपरम्पार-2 जी बधाई होवे  तपस्या से

Guru

Mahashrmani Ji (pramukha Shree Ji)

Manbhawvan mousam mahak raha ye Mangal bela aayi hai Guruvar ki charan Sharan pakar murjhi bagiya viksayi hai He sarswati sakshat Mahasativsr hum Vandan karte hai Singapur ke shrawak shradha se jhuk Abhinandan karte hai He mrudubhashi Mamata ki Murat Tav sannidhi Shukh dayi hai He shakti ki sanvahini humoko bhi aisa vardan mile Gyan

Tapsya

Tapsya Ki Ye Bahar Kaisi Chhayi Hai

तपस्या की ये बहार, देखो केसी छाई है,  अट्ठाई की आज, इनको बधाई है  शासन माता आती है, भाव जगाती है,  तपसन को आज मां, शक्ति दे जाती है।  शासन माता  को जो ध्यावे मन वांछित फल वो ही पावै)-2  रूप अनुपम तेज निराला, मन को मेरे हरने वाला  शासन माता आती है- 2. धन्य

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