Jivan Sanyam Se Mahkaya Hai,geet Varshitap

(लय-दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है)

जीवन संयम से यहां महकाया है, वर्षीतप का उत्सव खुशियां लाया है। तप के मंगल गीत झिलमिल करते हैं पुण्य का प्रकाश आंगन छाया है।।
1. आसमां से आज सुख कितना बरसता है,
 ऐसा सुख तो पाने को हर कोई तरसता हैं। 
धन्य है तपसी जो वर्षीतप कर पाया है-2 वर्षीतप का उत्सव खुशियां लाया हैं।।
2. हो लगन तो हर कठिन आसान बन जाए,
 रास्ते का शुल पल में फूल बन जाए। 
मन को समता से बडा तुमने सजाया है।। वर्षीतप का उत्सव खुशियां लाया है।।
3. खूब देते है बधाई आज हम तुमको, 
तप किया तुमने बडा सबका नमन तुमको। हमने मंगल भावों से यह गीत सजाया है ।। वर्षीतप का उत्सव खुशियां लाया है।।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top