दीप जला दो, आंगन, आंगन
ये प्रकाश के पंख रुपहले दूर क्षितिज पर जाकर पहले कर देअपना विज्ञापन यह, दीप जला दो आंगन-२
धुंधले पथ अंधियारी राहें, पकड़ पकड़ ज्योतिरमय बांहे
स्वर्ग बना दे जगत अपावन
3 अंधकार का नष्ट गर्व है दीप जले है ज्योतिपर्व है
उजाला -२ दामन-2
मन से मन का दीप जलायै आजीवन जनजीवन गाएं
द्वैष भाव का किए विर्सजन