तर्ज :- (राग मालकोश)
चिन्ता चूरो हे चिन्तामणी, पार्श्वनाथ भगवान्,
पाश्र्वनाथ भगवान् हमें दो सद्बुद्धि और ज्ञान।
हम मूरख अज्ञानी, हमें कोई सच्ची राह दिखादो,
अष्ट कर्मों को क्षय, करने का सरल उपाय बता दो,
तू है पार ब्रह्म परमेश्वर, हम बालक नादान ।। १ ।।
बड़ी मुसीबत के मारे, भव-भव के हम दुःखियारे,
महिमा सुनकर नाथ, तुम्हारो आये तेरे द्वारे.
है पुकार हम दीन-जनों की, सुनलो दया निधान ।। २ ।।
हे जगदीश्वर ईश्वर, तूं परमात्म अन्तर्यामी,
पुरुषादानी आप कहाते. हे त्रिभुवन के स्वामी, “वीर मंडल” तो सदा हृदय में, धरे तुम्हारा ध्यान ।। ३ ।।
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