Akshay Tritiya Ka Su Pawan Parv Aagaya

अक्षय तृतीया का सुपावन पर्व आ गया । 
दे रहा-२, संदेश तप का हर्ष छा गया ॥
१. प्रथम तीर्थकर ऋषभ भगवान मुनि बन कर। 
आहार पानी के लिए वे घूमते घर-घर। 
अन्त में-२, श्रेयांस सारा राज पा गया ॥
२. मात्र भिक्षा ग्रहण करना चाहते बाबा। 
लोग देते जो, नहीं वो चाहते बाबा । 
देह दुर्बल-२, बदन पर तप तेज छा गया ॥
३. राजपथ पर चल रहे प्रभु नजर में आए।
 महल से श्रेयांस उतरा, भावना भाए। 
प्रभु पधारे-२, महल में आनन्द आ गया ॥
४. पारणा प्रभु का हुआ था इक्षुरस का दान । 
धन्य बेला, पल सुमंगल, हर्ष है असमान। 
दान की-२, महिमा बढ़ी उल्लास छा गया ॥
(तर्ज : कोरा कागज)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top