Jhirmir Jhirmir Mevaj Barase

भाचा

झिरमिर
झिरमिर-झिरमिर मेवज बरसे ओ, परनाळ्यां पाणी पड़े जी।
१. उत्तर-दिखण स्यूं दोय मुनीसर आया ओ, आय उत रिया हरिये बड़ तलेजी
। बूझत-बूझत नगर ढंढोर्यो ओ शासन देवत माता रो घर किस्यो ।
२. ऊंची सी मेडी ओ अजब झरोखो ओ. केळ झबरको माता रे बारण जी। 
अब म्हारा सासूजी साधां रै पधारया ओ, मुनीसर बेहरण आइया जी।
३. लाडू बराया माता जलेबी बराई ओ, घेवर बेराया भल भाव स्यूं जी। 
दाळ बराई माता चावळ बराया ओ, तरकारयां बराई मोटे भाव स्यूं जी।
४. पापड़ बराया माता खीचिया बराया ओ, तळनो बरायो मोटै भाव स्यूं जी।
 ओगा बराया माता पूंजणी बराई ओ, पातरा बराया भल भाव स्यूं जी।
५. सुण-२ ए म्हारी लाल पाड़ोसण, म्हारी ओ सासू आगै मत कहीज्यो। 
गूंनगिरी रो थानै लाडु ओ देस्यां, डावै ओ पग रो देस्यां नेवरो जी।
६. नदी में बहावां थारो गूंनगिरी रो लाडु ओ, तड़कै ओ तोड़ां पग रो ताजणो।
 म्हारी जीभड़ बाई कुबेळ्यां री बीन्ही ओ, कद थारा सासू आवै कद कैवांजी।
७. अब म्हारा सासूजी ओ घरां रे पधारया ओ, पाड़ोसण दौड़ बातां कहीजी।
 देवी ना धोक्या माता, देवता ना धोक्या ओ, सगळा स्यूं पेली साध बहराहिया जी।
८. उठो बेटा अटीसिंह कंवर हमारा ओ, बेगा ओ काढो घर री कुळ बहू जी। उठो बेटा देवकण उठो बेटा सेवकण, थांरा ओ दादीसा देखूंटो दियो जी।
६. काळा-सा बळदां बेटा बैल जुड़ाया ओ, आप सारथी अटीसिंह होय रह्या जी।
 सासरियै नै छोड्या, माता पीहरियै नै छोड्या ओ, वनरोही में छोड्या ऐकला जी।
१०. सूखी तळाई माता सूखा जी अमला ओ, जठै ओ जाय वासो लियो जी।
 देवकण बेटे नै भूखज लागी ओ, सेवकण हुयो ओ तिसाइयो जी।
११. सूखी ओ तळाई माता दूघां ओ भरी जी, निरफळ अमलां रै फळ घणा जी। 
देवकण बेटे नैं आमलिया चुसाया ओ, सेवकण बेटै मैं दूध पिलाइयो जी।
१२. अब म्हारा सासूजी ओ रसोयां पधारया ओ, रसोयां रा थांभ रतनां जड्या जी। 
लाडु संभाळ्या माता जळेबी संभाळी ओ, घेवरां री दूणी-डोढी सिग चदै जी।
१३. पापड़ संभाळया माता खीचिया संभाळया ओ, तलने री दूणी-डोठी सिंग चढे जी। ओगा संभाळया माता पूंजणी संभाळी ओ, पातरां री दूणी-डोढी सिग चढे जी।
१४. उठो बेटा अटीसिंह कंवर हमारा ओ, बेगा तो ल्याओं पर री कुळ बहू जी। बहू ए बिना म्हारो आंगणियो अडीको ओ, पोता बिना ओ दादी उणमणा जी।
१५. धोला-सा बळदां बेटा बैल जुड़ाया ओ, आप सारथी अटीसिंह होय रया जी। उठो बेटा देवकण उठो बेटा सेवकण, थारा ओ दादीसा चेतै करया जी।
१६. ओल्यो बांरो देवकण लेल्यो थांरो सेवक्कण, म्हे तो ना जावां सासू रे बारण जी। सतरंगै मे जास्यां ओ शासन दे कहास्यां ओ, कुळ में ओ नांव कढायस्यां जी।
१७. बास करै ज्यानै म्हे सत देवां ओ, बेलो करे ज्यारै पास रहवां जी। तेलो करे ज्यानै म्हे सत देवां ओ, चोले में ओढां सुरंगी चूनड़ी जी।
१८. पंचोलो करे ज्यांनै म्हे सत देवां ओ, छवां में पैरो छल्ला मूंदड़ी जी। सात करै ज्यनि म्हे सत देवां ओ, अठाई में आटूं कर्म क्षय करया जी। पखवाड़ो करै ज्यांनें म्हे सत देवां ओ, महीने में मोक्ष द्वारिका जी।
□□□

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top