Japlo Shree Navkar

(लय- मिलो न तुमतो)

तन्मय होकर, मन को धोकर, जपलो श्री नवकार। 

णमो अरिहंताणं, णमो श्री सिद्धाणं,
 सब दुख हर्ता, मंगल कर्ता, महामंत्र नवकार। 
णमो अरिहंताणं णमो श्री सिद्धाणं ॥ ध्रुव ॥१. 
मोह को जिन्होंने मारा, अरिहंत देव विश्वाधार है। 
अष्ट कर्म नष्ट किए, सिद्ध प्रभु अपुनरवतार है।
 अशरण शरणं, भव भय हरणं परमात्मा अविकार । 
णमो अरिहं ताणं, णमो श्री सिद्धाणं ॥२. 
छत्तीस गुणों से शोभित, होते महान् धर्माचार्य है।
 आगम प्रवक्ता पावन, उपाध्याय होते अनिवार्य है। 
दिव्य दिवाकर, गुण रत्नाकर, धर्म संघ आधार। 
णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं ॥३. 
त्यागी विरागी मुनिजन, करते जो निज पर का कल्याण है। 
पंच महाव्रत पालक, ‘बंधन से मुक्ति’ लक्ष्य महान है। ‘मुनि संजय’ चुन सप्तवीसगुण वंदन बार हजार ।
 णमो सव्व साहूणं, णमो सव्व साहूणं 

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