स्वाम साचा अनुभुत वाचा कही रे
स्वाम साचा अदभुत वाचा कहीरे
कही रे-2
1 स्वाम भिक्षु परगटया जग माही माही कीरत थई रे-2
श्री जिन आणा सिर धरी-2 वर न्याय मतना कही रे
स्वाम साचा, अदभुत वाचा कही रे
2आगूच उत्तराध्ययन में इन धार पंचम बही रे-2
जिन बिना शिव पंथ होसी-2संत शब्द सही रे, कहीरै
स्वाम साचा-
3 संवत अठारहतिपना पछ सूत्रसंघ वृद्धि हुई रे-2
अंग चुलिया में वारता -2तू जाई प्रत्यक्ष ही रे सहीरै
4 द्वादश मुनि आगे गया पछ वृद्धि होयी रे-2
हेम चरण सुवृद्धि करण, -2प्रत्यक्ष वरण मिलही रे ,मिलही रै
5 स्वाम पारस् सारिखा चिंतामणि कर रही रे -2
भवदधि पोत उद्योत करता-2 स्वाम सूरज सही रे,सहीरे
6 स्वाम भिक्षु समरिया उगणीसे चवदा मही रे -2
बीदासर चौमास में -2जय सुजश कीरत होईरे ,होई रे