(लय : होठों से छूलो तुम…………..)
महावीर चरण में हम, सब शीष झुकाते हैं।
पावन श्रद्धा के आज, शुभ दीप जलाते हैं ॥ आं ॥
सिद्धार्थ कुल दीपक, मां त्रिशला के नन्दन २
कुंडलपुर में जनमें, छाई थी नव पुलकन ॥
मंगलमय गीतों के दो बोल सुनाते हैं ॥१ ॥
महावीर चरण में हम…………
माता की ममता को, कितना था मान दिया – २
भाई की प्यार भरी विनती को मान लिया ॥
करुणा के सागर की, दास्तान सुनाते हैं ॥२ ॥
महावीर चरण में हम…
चल पड़े अकेले तुम, भारी तप के पथ पर २
कष्टों को सहन किया, बैठे समता-रथ पर ॥
यह कैसा सन्यासी, जन समझ न पाते हैं ॥३ ॥
महावीर चरण में हम…………
संगम ने कष्ट दिया, धीरज से सहन किया २
ग्वालों ने खीर पका, तेरा इम्तिहान लिया ॥
रुकने का नाम नहीं, बढ़ते ही जातें हैं ॥४॥
महावीर चरण में हम…………