सुवो
बना हंसती ल्यावो जी, घुड़ला तो ल्यावो मूंग मोल का बना पड़लो ल्यावो जी, सालु तो ल्यावो सांगानेर को बनासा रा सुवा रे हेठ उतर तो लेल्यू गोद में
तन चुगो रे चुगावु रे, दाख जमेरी डोढ़ा एलची ।
तन पाणीड़ो पिलावु रे सोन की झारी बनी र हाथ में
तन बायरो ढूलावु रे, खस खस को पंखो बनी र हाथ में तन एसो रे पढांबु रे, हिन्दी अंग्रेजी उर्दू फारसी ।
तन एसो रे उडावु रे, उड़तो नहीं दिस असमान मं
बना भुकम्पो आयो जी, धरती तो धूजी चारु कुंटकी
बना बटलोयो गुड़ग्यो जी, दालज ढुलगी बेलु रेत मं
बना साग केम छमकुं जी, कड़ायो तो कुड़छी भाभीसा ले गया
बना फलका कैसे पोवु जी, चकलो तो बेलण बाइसा ले गया
बनी लेग्या तो ले जावणद्यो, आपां तो चालो रंग महल मं बना नींद कोनी आव जी, भूखां मरती रो दूःख कालजो । बनी घेवरीया छटाय दयूं, हलवाई रो बेटो म्हारो भायलो । बना घेवर कोनी भाव जी, फीणी तो भाव सांभर शहर की । बना फीणी कोनी भाव जी, रसगुल्ला भाव कलकत्ता शहर का
बना रसगुल्ला कोनी भाव जी, भुजीया तो भाव बिकानेर का
बना भुजीया कोनी भाव जी, कतली तो भाव असल बिदाम की
बना कतली कोनी भाव जी, रोटी तो भाव तीख लुण की बनी लुण कठ स्यूं ल्यावां ए, सामर तो हूग्यो अंग्रेज मं बना रोटी कोनी भाव जी, ओल्यूं तो आव मायर बाप की बनी चालो स्टेशन, टीकट कटाद्यां थार पीर की
बना लेवण बेगा आओ जी, ओल्यूं तो आव थांर हेत की बनी चार दिन राखां ए, पांचव दिन आवां सिमरथ पावणा बना मालण आई जी, खरबुजो ल्यायी बिकानेर को
बना खरबुजो भाव जी, खरबुजो लेद्यो मूंग मोल को बनी क्यास्यु लेखूं ए, आनी दो आनी नहीं म्हार जेब म
बना दुजवरक जांती जी, खरबूजों खांती बिकानेर को बना इकवरीयक आई जी, खरबूजों नहीं खायो मूंगा मोल को
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