Sarsvati Vandana (3)

1सरस्वती वन्दना

माँ सरस्वती तेरे चरणों में, हम शीश झुकाने आयें है। दर्शन की भिक्षा लेने को, दो नयन कटोरे लाए हैं।।
अज्ञान अंधेरा दूर करो और, ज्ञान का दीप जला देना। हम ज्ञान की शिक्षा लेने को, माँ द्वार तिहारे आए हैं।।
हम अज्ञानी बालक तेरे, अज्ञान दोष को दूर करो। बहती सरिता विद्या की, हम उसमें नहाने आए हैं।।
हम साँझ सवेरे गुण गाते, माँ भक्ति की ज्योति जला देना।। क्या भेंट करु उपहार नहीं, हम हाथ पसारे आए हैं।।
माँ सरस्वती तेरे चरणों में, हम शीश झुकाने आयें है। दर्शन की भिक्षा लेने को, दो नयन कटोरे लाए हैं।।
2सरस्वती वन्दना
माँ सरस्वती वरदान दो, मुझको नवल उत्थान दो। यह विश्व ही परिवार हो, सब के लिए सम प्यार हो। आदर्श, लक्ष्य महान हो। माँ सरस्वती.. मन, बुद्धि, हृदय पवित्र हो, मेरा महान चरित्र हो। विद्या विनय वरदान दो। माँ सरस्वती.. माँ शारदे हँसासिनी, वागीश वीणा वादिनी ।
मुझको अगम स्वर ज्ञान दो। माँ सरस्वती, वरदान दो। मुझको नवल उत्थान दो। उत्थान दो। उत्थान दो…।सरस्वती वन्दना
3
जयति जय जय माँ सरस्वती, जयति पुस्तक धारणी। जयति पद्मासना माता, जयति शुभ वर दायिनी। जगत का कल्याण कर माँ, तुम हो विद्या दायिनी। जयति जय जय माँ
कमल आसन छोड़ दे माँ, देख जग की दुर्दशा। शान्ति की सरिता बहादे, फिर से जग में जननी। जयति जय जय माँ

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