“Sun Lo Osiya Wali”

सुन लो ओसियां वाली
(तर्ज : सावन का महीना……)
सुन लो ओसियां वाली, लो अंखिया को खोल, देखो मेरी नैय्या मैय्या, हो रही डांवाडोल ।।
छायी है मैय्या देखो, गम की बदरिया, डर मोहे लागै अब तो, चमके है बिजुरिया, ऐसे अंधियारे में, मैं जाऊं किस और ।। 1 ।।
तेरे सिवा अब मैय्या, कोई ना हमारा, हम को तो मैय्या बस, तेरा ही सहारा, मर्जी है तुम्हारी, ले जावो जिस और ।। 2 ।।
तेरी दया बिन मैय्या, पार कैसे जाऊं, बीच भंवर में हूँ मैं, हिचकोले खाऊं, नैय्या है पुरानी, और तुफान बड़ा जोर ।। 3 ।।

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