सामायिक साधना
सामायिक पाठ
करेमि भंते। सामाइयं सावज्जं जोगं पच्चक्खामि जाव नियमं (मुहुत्तं एगं) पज्जुवासामि दुविहं तिविहेणं न करेमि न कारवेमि मणसा वयसा कायसा तस्स भंते ! पडिक्कमामि निंदामि गरिहामि अप्पाणं वोसिरामि।
सामायिक आलोचना पाठ
नौंवें सामायिक व्रत में जो कोई अतिचार (दोष) लगा हो तो मैं उसकी आलोचना करता हूं।
१. मन की सावद्म प्रवृत्ति की हो।
२. वचन की सावद्य प्रवृत्ति की हो।
३. शरीर की सावद्य प्रवृत्ति की हो।
४. सामायिक के नियमों का पूरा पालन न किया हो।
५. अवधि से पहले सामायिक को पूरा किया हो।
तस्स मिच्छा मि दुक्कडं । -इनसे लगे मेरे पाप मिथ्या हो, निष्फल हो।
संवर पाठ
पांच आश्रवद्वार, छः काय (१८ पाप) सेवन का दो करण तीन योग से (…. मिनिट तक) तक त्याग करता हूँ।
संवर आलोचना पाठ
संवर सम्पन्न होने पर पांच नवकार मंत्र बोलकर ‘तस्स मिच्छा मि दुक्कडं’ कहना चाहिए।