Pankhida O Pankhida

पंखीड़ा औ पंखींड़ा – २

पंखीड़ा तू उड़ नै ज्याइजै सिरियारी रे, बाबा भिक्षु नै म्हारी, वन्दना कहीजै रे ॥ स्थायी ॥
ॐ आयो दूर स्यू-३ आयो, म्हारी बात कैवणन । प्रभु तु ही आधार म्हारी, नांव खैवण न: हो… प्राण तू ही, त्राण तू ही. रहतो रहीजै रे
जन्म जन्म स्यूं -३, प्रभु थांरो म्हारौ साथ है। आगे थांरे ही साथ रहस्यूं, साची बात हो… गीत तुं संगीत यूं ही, बहतो रहीजै रे।॥२
*शुभ कामना-३, सोलह आने फलगी आज हो ●
 सारा देश ने थां पर तो, पूरो नाज हो
भक्त में भगवान तूं ही, रहतो रहीजै रे॥३
सोतां जागतां -३, हिवडे में थांरो नाम रे हो.. गुरु दृष्टि से सुधरे हैं सारा काम हो. तन में तूं ही, मन में तू ही, दूर न रहीजै रे ॥४ 
भवा

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