(तर्ज : सारी सारी रात तेरी याद……)
मायरो बाई रो भरवा विरो म्हारो आयो रे ।
बिरो म्हारो आयो साग भोजाई न ल्यायो रे ॥
बीरो भनावण जाऊ आरती रो थाल सजाऊं
मधुर मधुर गीत गाऊ,
मीठो मीठो शर्बत पाऊ
जामण जायो बीरो म्हारो, अति हर्षायो ॥ बीरो ..
. हाथांरी रेखा म्हारी, मेहन्दी स्यूं धुप गई सारी
रुपा सोना स्यूं भर गई, आरती री थाल म्हारी
नेह रो खजानो आज, थाली में सजायो रे ॥ बीरो
बीरा रो मुखड़ो चमके, भावजरी चूड़ीयां खनके
प्रेम री आ भूखी बेनड़, नीरख और मन में पुलके खुशीयांरो सागर आज, उमड उमड़ आयोरे ॥ बिरो
बीरा री नजर उतारुं, भावज से मान बढाऊं
इसी बेला फेर आओ, मन में बधावो गांऊ
म्हारी शुभ कामना, साथ में ल्याई रे ॥ बिरो ***