तर्ज : ओ जाने वाले जादुगर…….
हे वीर तुम्हारे द्वारे पर, एक दर्श भिखारी आया है,
प्रभु दर्शन भिक्षा पाने को, दो नयन कटोरी लाया है
-: अन्तराः –
नहीं दुनियां में कोई मेरा है, आफत ने मुझको घेरा है,
प्रभु एक सहारा तेरा है, जग ने मुझको ठुकराया है।
हे वीर
धन दौलत की कुछ चाह नहीं, घरबार छुटे परवाह नहीं, मेरी इच्छा है तेरे दर्शन की, दुनिया से मन घबराया है।
हे वीर
मेरी बींच भंवर में नैया है, बस तू ही एक खैवया है, लाखों को ज्ञान दिया तुमने, भव सिन्धु से पार उतारा है
हे वीर प्रीतआपस मेंऔर प्रेम नहीं,
तुम दर्शन बिनअब हमकोंचैननहीं
अब तोभक्तोंकाआकरबेड़ाकेपारकरो ॥
हे वीर