Samay O Beet Jyavelo

• समय ओ बीत ज्यावैलो

(लय : धर्म की लौ जलायें…)
समय ओ बीत ज्यावैलो ।
जाग, फिर ओ अवसर थारै, हाथ न आवैलो ॥
१. फूल झूलतो टहणी स्यूं, झटकै नीचे गिर ज्यावै, 
हर्या-भर्या रूंखां रा पल में, पान-पता खिर ज्यावै। 
बिजली रो आखिर झबकारो, ओ छुप ज्यावैलो ॥
२. थांरी म्हांरी में ओ सारो, जीवन बीत्यो ज्यावै,
 बिना स्वार्थ पूछै नहीं कोई, सब मतलब स्यू आवै।
आत्म-ज्ञान बिना कै थारै, साथ ज्यावैलो ॥
३. नदी किनारे बंधी झुंपड़ी, कद जल में बह ज्यावै, चिण्या-चिणाया महल-मालिया, सारा ही ढह ज्यावै। 
तप, जप, त्याग बिना प्रभुवर नै, किंयां रिझावैलो ॥
४. भलो भलाई नै नहीं छोड़ै, चाहे संकट आवै, 
झूठो डरै फिरै गलियां में, आखिर तक घबरावै। 
खरी कमाई बिना बोल तू, कांई खावैलो ॥

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