तर्ज:- (सारंगा तेरी याद में)
है पारस चिन्तामणि, अर्ज करें तुम से प्रभु,
चिन्ता चूरण हार, भव से पार उतार ।
जीवन में दुःखड़े मिले, हमको बारम्बार,
आशाओं की वीण के, टूट चुके हैं तार,
जो तुम रूठ गये प्रभु रूठ गया संसार ।। १ ॥ है पारस ।।
आज तेरे दरबार में, दीन रहे हैं पुकार,
मुक्ति नगर में आप हो, हम पापी संसार,
जन्म-मरण संकट कटे, तारो तारनहार ॥ २ ॥ है पारस ।।
दर्शन पाकर आपके, धन्य हुए भगवान,
तुम हो सागर ज्ञान के, हम प्यासे अज्ञान,
“वौर मण्डल” तेरे प्रभु, नित्य करे गुणगान ।। ३ ।। है पारस ।।