( लय- बारबार तोहे क्या समझाऊं)
आभओ प्रत्रु मोहू दर्शन दो, मैकब से करपुकार तुम बिन प्रभुजी कौन करे कर भवचार हाथ जोड़ में अरजकरू सुतजग के पालन हार (कुम बिन प्रभुजी बैन करे भवपार
लख चोरासी फिर करूआयो पास तेरे जन्म मरण दुख मेटो दीनावाथमेरे छल भऔर उपर भराद्वतिया में सच भी जाताहर)A पलक
पलका ऊपर छाई है अंसुवन धारा E तुम बिन प्रभुनी सूना है ये जगसारा घर-2 में मेरे आन विरानो दुखियों के आधार
भक्ति अरे हृदय से हम अरदासेकर ऐसा दो वरदान जो जीवन सफल करे 0 सब करे गुणगान तेरा मन की भेडार