गणेश बन्दना
(तर्ज : खडी नीम के नीचे में तो एकली)
आवो गजानन्द बैठो गजानन्द छाँव मे २
कारज सिद्ध करो गणदेवा म्हारा
बने रे ब्याह में, नवल बने रे ब्याह में ।
आवो गजानन्द
सबसे पहले बनडे रा माताजी गजानन्द ने ध्यावे है – २
सोने रुप की बगली में फूलो री साज सजावे है- २
बाँध घुघरा हो हो- २, आवो गजानन्द पॉव में ।
कारज सिद्ध करो
भुआजी और काकीजी तो थारा ही गुणगान करें केशरीया धोती और दुपट्टा थारे आगे भेट धरे
पैर ओढ कर हो हो- २, आवो गजानन्द ब्याह में ।
कारज सिद्ध करो
बनडे रा भईया और भाभी मन ही मन म विनय करें
जीम जूठ कर खुश हो गणपत, म्हारो सारो विध्न हरे सबसें पैली हो हो- २, गणपत न्युतो ब्याह में ।
कारज सिद्ध करो
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