पर्युषण पर्व
(लय-कजरा मोहब्बत वाला)
महावीर ने पथ दिखलाया, पर्व पर्युषण आया
जैनियों की है पहचान, करने कमाई धर्मध्यान
समता के फूल खिले है, अन्तर्मन दीप जले है
रोशन है सारा जहान, करले कमाई धर्म ध्यान
महावीर ने पथ दिखलाया—-
सत्य अहिंसा करुणा जीवन में हम अपनाये -2
सद्गुण मुक्ता को अपने खेतो में हम निपजाये,
गुरु की सन्निधि में बेठे, अमृत जी भर पी पाये-2
कानो में मिश्री घोले, आगम वाणी जब बोले
गुण की अलबेली है ये खान,करले कमाई धर्मध्यान
महावीर ने पथ दिखलाया—-
तप जप की पावन गंगा आई है द्वार चलकर-2
कर में ले (है )माफीनामा, अपना ममकार तजकर
मैत्री से अपनी झोली लाये है आज भरकर -2
जिहा पर मिश्री घोली, बोले हितकारी बोली
खामेमि (क्षमा) की छेड़े आज तान,
करले कमाई धर्म ध्यान
महावीर ने पथ दिखलाया पर्व पर्युषण आया
जैनियों की है पहचान, करने कमाई धर्म ध्यान