।। श्री गणेश वन्दना ।।
(तर्ज-अपने पिया की मैं तो बनी…)
आवो विनायक म्हारै आंगणियै में आवो, रिद्ध-सिद्ध थारै सागै ल्यावो जी, म्हारै आंगणियै में आवो, आवो विनायक….
खाटू हालै श्यामजी को, कीर्त्तन म्है करावाँ,
कीर्त्तन मांहि पहल्यां-पहली, थानै ही मनावाँ,
मूसे सवार होकर, बेगा आवोजी, म्हारै आंगणियै…
दुन्द-दुन्दाला सुण्ड-सुण्डाला, लम्बोदर कहलावो,
विघ्न विनाशक, मंगल कारक, बाधा दूर हटावो,
भगतां की आशा तो, पुरावो जी, म्हारै आंगणियै…
अष्ट सिद्धि नव निधी का दाता, ज्यादा ना तरसावो,
शुभ और लाभ का देणै वाला, सुख सम्पति बरसावो, ‘रवि’ कहै दरश, दिखावो जी, म्हारै आंगणियै…
१