Piya Girnar Na Jao

पिया गिरनार ना जाओ

(तर्ज : कर सोला सिणगार, चाली पाणी ने पणिहार….)
 पिया गिरनार ना जाओ, तुम्हें राजुल बुलाती है, तुम्हें राजुल…। मुझे ना छोड़कर जाओ, तुम्हें राजुल बुलाती है, तुम्हे राजुल…।। ध्रुव ।।
पिया लौटा के रथ अपना, क्यूं मेरे दिल को तोड़ा है,
 तुम्हें करुणा जो प्यारी है, मुझे रोती क्यों छोड़ा है,
 दया कर लौट भी आओ, तुम्हें राजुल बुलाती है, तुम्हें राजुल… ।।१ ।। 
तुम्हें दोषी कहूँ कैसे, मेरे कर्मों का फेरा है, 
सुनाऊँ पर व्यथा किसको, तूं ही तो एक मेरा है, 
जरा इकबार सुन जाओ, तुम्हें राजुल बुलाती है, तुम्हें राजुल… ।।२।।
तुम्हें संयम ही लेना है, मुझे भी साथ ले जाओ,
 कहे ये ‘भक्त-मण्डल’ भी प्रभु अब यूं न तरसाओ, 
अरज मेरी भी सुन जाओ, तुम्हें राजुल बुलाती है, तुम्हे राजुल… ।।३।।

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