७.
भात भरण आयो म्हारो रे जामण जायो, तारां जड़ी ल्यायो चुनड़ी फुल्यो न समायो म्हारो मनड़ो उमायो, बाई हीरां बीच लाल जड़ी – २
नौलख हीरा चुनड़ी जडावै, दसलख मोतीड़ा चमकै – २
सवा लाखको ओढरे गोरवरु घुंघट पर चन्दा चमकै – २
हियो हरषावै उर आनन्द समावै, जद बीरो जी ओढावै चूनड़ी, फूल्यो न समायो…
चन्दन चौकी करुं रे आरतो, जामण जाय बीर को
भावज और भतीजा निरंखु, नाम बड़ो म्हार पीरको – २
नगर सरायो, घर भर्यो रे सवायो, सासु देवर सरावै चूनड़ी, फूल्यो न समायो
जुग जुग जीवो म्हारा भाई रे भतीजा, मां बबुल को कुल उजलै
सर्व सवागण भावज प्यारी, दूधा न्हावे पूतां फलै – २
दादी-मां रो जायो, म्हार आंगणे में आयो, यो शुभ दिन आज की घड़ी फुल्यो न समायो….. भारत भरण आयो म्हारो. फुल्यो न समायो
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