भगवान तुम्हें मैं खत लिखती पर पता मुझे मालूम नहीं दुःख भी लिखती सुख भी लिखती पर पता मुझे मालूम नहीं
सूरज से पूछा चंदा से पूछा पूछा टिम टिम तारो से
इन सबने कहा अम्बर में है पर पता मुझे मालूम नहीं
फूलो से पूछा कलियों से पूछा पूछा बाग के माली से
इन सबने कहा हर डाल पे है पर पता मुझे मालूम नहीं
नदियों से पूछा लहरों से पूछा पूछा झर झर झरनो ने कहा इन सबने कहा सागर में है पर पता मुझे मालूम नहीं
साधु से पूछा संतो से पूछा पूछा दुनिया के लोगों से
इन् सबने कहा हृदय में है पर पता मुझे मालूम नहीं