Kuye Par Game Ka Geet (Namkaran)

*

कुवा पर गाने का गीत
समन्द तलांवा धण गई, माय मोरी सुख्या ए समन्द तलाव, 
चकवो चकवी उड गया । बाग बगीचा धण गई, 
माय मोरी सुख्या ए दाड़म दाख, चम्पोजी मरवो केवड़ो ।
हाट बजारा धण गई, माय मोरी सुत्या ए महाजन लोग, हाटयां रा ताला जड़ रया ।
राम रसोयां धण गई, माय मोरी जीम ए देवर जेठ, हाथ पकड़ आगी करी । 
रंग महल में धण गई, माय मोरी सुत्या ए सासुजी रा पुत मुख पर दूपट्टो मेलीयो । 
क्यू जाई ए मावड़ी, माय मोरी क्यूं जाईए किरतार, कुखड़ली बेरण हुई । कृणाजी आग विनती, माय मोरी कुण सुणलो पुकार, 
कुखड़ली बेरण हुई । नौदस मास पुरा हूया, 
माय मोरी जनम्यो ए लाड़ण पूत, कुखलड़ी सफल हुई । बेमाता आग विन्नती, माय मोरी राम सुणलो पुकार, कुखड़ली सफल हुई । 
समन्द तलावा धण गई माय मोरी भरीया ए समन्द तलाव, चकवो चकवी रम रया । 
बाग बगीचा धण गई, माय मोरी हरिया ए दाइम दाख, चम्पो जी मरवो केवडो । 
हाट बजारा धण गई माय मोरी बैठ्या ए महाजन लोग, हाट्या रा ताला खुल गया। 
राम रसोया धण गई माय मोरी जिम ए देवर जेठ हाथ पकड़ नेडी करी । 
रंग महल में धण गई. माय मोरी सूता  ए सासजी रा पूत दोय पग सामा बे दिया । भल जाई ए मावडी, माय मोरी भल जाई ए किरतार कुखडली सफल हई ।
***

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top