Alakh Jagawa Swamiji Re Nam Ri

अलख जगावाँ

लय : ले चालू तने खेत में
अलख जगावाँ स्वामीजी रे नाम री, 
झुक झुक करां प्रणाम । प्यारो लागे है सांवरिये रो नाम, माला फेरा हाँ रोज सवेरे शाम ॥
मरुधर रो वीरो कोहिनूर हीरो, चमक्यो देश-प्रदेश। जनम्यो कांटा में रम्यो हो भाटा में, ल्यायो नव उन्मेष ॥१ ॥ प्यारो
बरस्यो हो ईमरत, लोग हुया तिरपत, जाग उठी तकदीर। धर्म री विवेचना, मर्म भरी देशाना, तोड़ी भ्रम जंजीर ॥२ ॥ प्यारो
तत्व प्रतिबोधी, मिलावट विरोधी, सिरयारी रो संत। साधुपण पालै, न्याय पथ चालै, वो मतिमान महन्त ॥३ ॥ प्यारो
एक अनुशासना बिना है विकास ना, अनुशासित ओ संघ । शुद्ध रीत-नीत हो गुरुवां पर परतीत हो, परमानन्द प्रसंग ॥४॥ प्यारो
स्वामीजी रो आसरो केन्द्र विश्वास रो, अन्तर्मन रो राम। संकट कटै है विघ्न मिटे है, सिद्ध हुवे सब काम ॥५ ॥ प्यारो..
महाप्रज्ञ’ रे प्रताप स्यू, भिक्ष-भिक्ष जाप स्यू, आठू पहर आराम। शहर सिरयारी सुरगा री फुलवारी, पावन तीर्थधाम ॥६ ॥ प्यारो..

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