(तर्ज : बाईसा रा बीरा जयपुर …)
बिनायक म्हार आंगणे बिराजो जी ब्याव रो सारो थे कारज सारो जी ।
ऊंचो तो थान आसन देवां जी, सगला स्यु पेली म्हे थान मनावा जी
(१) (२) रिद्धि सिद्धि र साग बेगा पधारो जी, रोली और मोली स्यू म्हे थान मनावांजी
(३) फूला स्यूं थारी झांकी सजावां जी लाडू से थार म्हे भोग लगावां जी
(४) गजानन्द थान सगलाही ध्यावां जी, सगला ही थार म्हे धोख लगांवां जी विनायक म्हार आंगण…
(तर्ज – बहुत प्यार करते है तुमसे सनम)
बिरद विनायक, हे गजबदन – २
चरणों में थारे – २ शत शत नमन । विरद विनायक
१) आओ विनायक म्हार आंगणे पधारो – २
व्याव रो कारज सिद्ध करावो ।
रिद्धी सिद्धी दाता सँग में – २ थान आमन्त्रण बिरद विनायक
२) मंगलकारी थे हो संकट हारी – २
म्हे सब आया शरण तिहारी
करो उजीयारो घर में – २ बाजे है मृदंग – विरद विनायक .
ओछी पींडी रा पग में नुपुर बाजे -२
केसर कसुम्बल रंग रो बागो साजे
रुक झुनकी कर देवो दर्शन -विरद विनायक