Diwali Par Kavita

DIWALI
छट जाये अज्ञान अंधेरा तो फिर रोज़दिवाली है। 
ज्ञान उजाला डाले डेरा तो फिर रोज़दिवाली है। 
मन अवध में राम जो आये तो फिर रोज़दिवाली है। 
अहंकार का वध हो जाये तो फिर रोज़दिवाली है। 
ज्योत से ज्योत जगाते जायें तो फिर रोज़ दिवाली है।
 रोशन राह बनाते जायें तो फिर रोज़दिवाली है।
प्रेम प्रीत की फुलझड़ी हो तो फिर रोज़ दिवाली है।
मन से मन  की जुड़े कड़ी  तो फिर रोज़ दिवाली है।
समदृष्टि की बंटे मिठाई तो फिर रोज़ दिवाली है।
जग हो इक परिवार के जैसे तो फिर रोज़ दिवाली है।
झूठ पर मन की विजय हो तो फिर रोज़ दिवाली है।
कहे ‘सत्य की जय हो तो फिर रोज़ दिवाली है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top