Namkaran
(तर्ज – सज रही गली मेरी …)
झुल रहा देखो नन्दलाल, चंदन के झूलें में। चन्दन के झूले में, रेशम के झूले में। झुल रहा देखो मुन्ना का दादाजी देखो बड़ा है खर्चीला मुन्ने की बधाई में बांटे, नोटो की गड्डीयां। झुल रहा
मुन्ने के दादीजी देखो बड़ी है आलसी
जीमने को बैठे तो खावे, एक सेर लापसी । झुल रहा
मुन्ने के बाबाजी देखो बड़े है रसीया ।
मून्ने के गीत में बांटे, टाइम की घड़ीयां। झुल रहा …
मुन्ने की बडीयाजी देखो बडी है चटोरी ।
खाने को बैठे तो खावे, खीर दस कटोरी। झुल रहा … मुन्ने के फूफाजी देखो बड़े है रसीले ।
ले जावे चौपाटी और, खीलाये गोल गप्पे । झुल रहा … मुन्ने के भुवाजी देखो बडी है सयानी ।
देवे नहीं सुपारी, और पिलावे नहीं पानी ।
झुल रहा देखो नन्दलाल चन्दन के झूले में
चन्दन के झूले में रेशम के झूले में। झुल रहा देखो
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