तपस्या गीत,( लय- माई नी माई मुंडेर पे तेरी)
तपसी भाई के आंगन में, बोल रही है देवी,
तप करलो थे बेला आई, कह रही है देवी,
जैनम् जयति शासनम्, शासन देवी शासनम्-
चांद की तरह चमक रही थी, उस देवी की काया,
द्वार पे मेरे, आके उसने, नींद से मुझे जगाया,
तप का रंग चढ़ा के सुंदर तप का रंग चढ़ा के
सुंदर, करदी काया मेरी, तप करलो ये बेला आई, कह रही है देवी, जैनम् जयति शासनम्, शासन देवी शासनम्
मन्नत मांगी थी मैने, ईक रोज मैं दर्शन पाऊं,
देवी मेरे, आंगन आवे, बलिहारी में जाऊं,
तेरे दर्शनपा पूर्ण हुई है. तेरे दर्शनपा पूर्ण हुई है, आज जो आस ये मेरी, तप करलो थे बेला आई, कह रही है देवी, जैनम् जयति शासनम्, शासन देवी शासनम्
कटे पाप थे मन के सारे, तप जो भारी होरे,
फिर मन को अपने वशकरनाबड़ा कठिन है होवे,
हो जाए फिर तप ये पूरा. हो जाए फिर तप करलो तप थे पूरा, सत मेरी माता देती, थे बेला आई, कह रही है देवी,
आलापमें
जैनमू जयति शासनम्, शासन देवी शासनम् – हो हो, होओओओ ओओओओ ओ, हो हो होओओओ. हाहा, हाआआआ आआआआआ, हाहा, हाआआआ, आआआआआ