गोरडी कर सोलहा सिंणगार
गोरडी कर सोलहा सिंणगार चाली पाणी न पणिहार,
पाणी न पणिहार, चाली पाणी न पणिहार ,
गोरडी कर सोलह सिंगार चाली पाणी न पणिहार——–
खाली बैठ बेमाता रूपा दे उणिहार ,
नेण नखत का तीखा जाणे बिजली के पल्कारे ,
ले चंदा स्यु रूप उधार ,चाली पाणी न पणिहार
बूँटया वाली लाल कांचली गौरी क तन ओपी
घाघरा पर सुआ कसुमल चुनड़ लग चोखी
आयी पल्ले न फटकार , चाली पानी न पनिहार —-
चुड़लो बाजूबंद बोरलो ,कान सूरलिया साजै
कड़िया पति ,पग नेवरिया,पगा बिछुड़िया बाजे
गले में पहन ननौलख़ो हार ,चाली पाणीन पणिहार
घड़लो भरता मुख देखण जड़ पूण दियो फटकार
पाणी ढूलग्यो सुरजी चमकयो बिजली रो पलकार,
बाजी झान्झर री झणकार, चा ली पाणी न पणिहार——–