।। श्री श्याम वन्दना ।।
(तर्ज-क्या खूब लगती हो….)
श्रृंगार कन्हैया का, बड़ा प्यारा लगता है,
सजधज के, औरो से, न्यारा लगता है,
तीन लोक में सुन्दर श्याम हमारा लगता है ।। टेर।।
अधरों पे सजे हैं मुरली, हाँ मुरली,
हम भक्तों की नींदे इसने हर ली,
नैनो से करे है घायल, हाँ घायल,
ये रूप निरख हो गये तेरे कायल ।। सजधज… ।।१।।
क्यूँ होठ रचाई लाली, हाँ लाली,
दिवानों के मन को मोहने वाली,
होले से तेरा मुस्काना, मुस्काना,
हम भगतों को कर देता दिवाना ।। सजधज… ।।२।।
घुँघराले गेसू लटके, हाँ लटके,
श्रृंगार तेरा आज सजा है हटके,
मनमोहक अदा निराली, हाँ निराली,
कहें हर्ष’ हमें वश में करने वाली । । सजधज… ।।३।।