Moong Bikherane Ka Geet

-: मूंग बखेरने की टाइम गाना :-

जोशी जी री हाट बनों गयो ए. कोई जोशण पकड्‌यो हाथ मूंग बखेर गयो ए।
 तें मत जाणी जोशण एकलो ए, साथ छडीदार चौकदार हाकम न हवालदार, काका ऊब्या किल्लदार मामा ऊब्या मायरदार, भाई भतीजा सो परिवार म्हार दादाजी सरीसा ऊमराव, मंग बवार लेस्यां ए । 
सोनी जी री हाट बनो गयो ए कोई सोनण पकड्यो हाथ मूंग बखेर गयो ए बजाजी री हाट………पसारी री हाट.. कनोई री हाट…….तम्बोली री हाट. सजना री पोल बनो गयो ए कोई बनडी पकड्‌यो हाथ मूंग बखेर गयो ए। त मती जाणी बनी एकलो ए साथ छडी दार चौकदार..
(उपर के सभी नाम लेने हैं)
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विवाह के नेगचार के गीत
घी पिलाने का गीत (न्यूतो)
चोखा सा चावल हलद पीला ज्यां घर जाई म्हारा भंवरा न्यूतबा मैं ते गांव न जाणु ए सैया नाम न जाणु, किण घर जांबू म्हारी सैया न्युतबा ओ तो गांव ईन्द्रगढ़, नांव सूरज बाबी, ज्यां घर जाई म्हारा भंवरा न्यूतबा
ओ तो गांव रणतभंवर, नांव गजानन्दजी, ज्यां घर …
ओ तो गांव सालासर, नांव हनुमान बाबो, ज्यां घर …
ओ तो गांव नाडो, नांव पीतरजी, ज्या घर
ओ तो गांव मिन्दर, नांव देवी देवता, ज्या घर
मिन्दरा म बैठी सारी देवाताण्या न्यूती वे म्हार बिरद सुधार सी चोखा सा चावल हलद पीला ज्यां घर जाई म्हारा भंवरा न्यूतबा (इस तरह पुरे परीवारका नाम लेणा)
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घी पिलाने की टाइम
घी पीवो रे म्हारा बालक बनड़ा घी पीवो । थांरी दादी पाव, बडीया पाव, मायड़ पाव, डोर हलाव, हमसे रलीया रामपुरे मजीरा बाज, घी गुड़ गाज, वैला शबद सुणाव पाड़ोसण सरीसा घुर्या नगारा जाणु जंगी ढोल घर चांरी बागा म उतरली जान रायजादा बनड़ा घी पीबो थांरी घणीरे हबोल चढ़सी जान, रायजादा बनड़ा धी पीवो ।
(काकी, भाभी, मामी, मासी सभी का नाम लेणा)
***बिड़द बिनायक का गीत
महार पीली जी गोबर रल मिल्या, ज्यां विच सोव पाण्डुक री रेखो सिग चढ़ ओ बिनायक बिड़दड्यां महार कक जी केशर रल मिल्या. ज्यां बिच सोव काजलीय रो रेखो, सिग चढ़ ओ विनायक विड़दड्यां
महार सोनो जी रुपो रल मिल्या, ज्यां बिच सोव मोतीड़ रो रेखो, सीग चढ़ ओ विनायक बिड़दया म्हार काशी जी पीत्तल रल मिल्यो, ज्यां बिच सोव तम्बे केरो रेखो, सीग चढ़ ओ बिनायक बिड़दड्यां
म्हार बलदेव जी ,किशन जी रल मिल्या, ज्यां बिच सोव सुभद्रा बाई रो दासो, सीग चढ़ ओ विनायक बिड्दड्यां
(इस तरह भाई बहनका नाम लेणा)
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२.
आई आई विड्द्यां जाण न देस्यां, पीली गोबर स्यूं लीपर लेस्यां सखी रे बधाबो म्हार आवीयो, 
रली रे बधावो म्हार घर आइयो आई आई विहृद्यां जाण न देस्यां, कुंकु केशर स्यूं चरचर लेस्यां, सखी रे आई आई विड्द्या जाण न देस्यां, 
हरीय मूंगा स्यू रोलर लेस्यां, सखी रे इणरे विहृदड्यां मेल्ली आधा, बिड़द सुधार रायजादे रा दादा, सखी रे
इणरे विडदड्यां मेल्ली आवा, बिडद सुधार रायजादे रा बाबा, सखी रे (आका-काका, हीरा-बीरा, आमा-मामा, ऊंफा-फंफा इजा-जीजा

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