“Maiyaji Tumhe Mai Khat Likhta

मैय्या जी तुम्हें मैं खत लिखता

(तर्ज : दिल लुटने वाले)
मैय्या जी तुम्हें मैं खत लिखता, पर पता मुझे मालूम नहीं।।
तेरा पता मुझे मालूम नहीं 2
मैंने फूलों से पूछा कलियों से पूछा, पूछा बाग के माली से । माली ने कहा हर डाल पे है, पर पता मुझे मालूम नहीं।।
मैंने सूरज से पूछा चंदा से पूछा, पूछा टिमटिम तारों से। तारों ने कहा माँ नभ में है, पर पता मुझे मालूम नहीं ।।
मैंने नदियों से पूछा पहाड़ों से पूछा, पूछा बहते झरनो से। झरनो ने कहा हर बूंद में है, पर पता मुझे मालूम नहीं है
मैंने बच्चों से पूछा बूढों से पूछा, पूछा ओसियां के भक्तो से । भक्तो ने कहा हर दिल में है, पर पता मुझे मालूम नहीं ।।
मैंने इनसे पूछा उनसे पूछा, पूछा मन्दिर के पंडित से । पंडित न कहा इस मूरत में है, पर पता मुझे मालूम नहीं।।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top