(लय- तुझे सुरज कहुँ या चंदा’)
शासन मिला प्रभू का, सौभाग्य है हमारा, आराधना हो ऐसी, न जन्म ले दुबारा
1. रिश्ते अनन्त हमने, हर जीवन में बनायें, कोई जगह नही है ऐसी, जहाँ जन्म हम ना पाये, चारों गति भटकते, नही पा सके किनारा ।।
2. नरभव मिले थे पहले, उपयोग ना करपाये,
सम्यक्त्व में ही जीना, यह भावना ना लाये,
हर कीमती समय को अज्ञान में गुजारा ।।
3. आओ रचे अभी हम, संकल्प की कहानी,
प्रतिकुलता हो कैसी, बनता है पुर्ण ज्ञानी,
संयम की राह चलके, छोडे़ प्रमाद सारा।।
4. कई जन्मों की यह करणी, पाया सुयोग सारा,
गौतम से कहते प्रभुवर, लो धर्म का सहारा,
पाकर रहेगे मुक्ति, संकल्प हो हमारा।।