रबड़ को ढोल
बनासा हस्ती लाज्यो जी, बनासा घुडला लाज्यो जी, घुडल म सब रंग लाय रबड को ढोल मंगा दयो जी ।
ढोल क रस्सा खिंचा दयोजी २ चिमनी रो पूरयो तेल
ढोल आकाशा चढ़ गयोजी ।मेम थारो साहेब गम गयो ए – २
कोई महार नगर की नई सड़क पर मेलो मंड गयो जी
बनासा म्हान मेलो दिखाद्यो जी २ कोई आप घोड़ा असवार बनी न मोटर मंगाद्यो जी
मोटर न धीमी – २ हांकोजी २ कोई गीर्द उड़ असमान बनासा थांरा पटा बुरीज जी नवल बनी म्हारो कांई सारोजी २
कोई राज कर सरकार बोट पानी म चाल जी मोटर में भूख लगी है जी २ कोई आप जीमो चावल दाल
बनीन घेवर छंटाद्योजी
मोटर में प्यास लगी है जी २ कोई आप पीवो ठण्डो नीर बनी न शर्बत पावो जी
मोटर में नीद लगी है जी २ कोई आप पोढो सुख सेज बनी न ढोलीयो ढ़लाद्यो जी
रसोइया दाल घुटा देरे बाटी क लाग्यो ताव चूरमो काचो रेग्यो रे
बनो बनी जीमर सुत्या रे २ बनड़ी रो दुख्यो पेट रात न दोन्यू जाग्या जी
बनासा बैद बुलादयोजी २ कोइ बैदां देखी नाड़ चूरमो काचो रेग्यो जी
बैदका न परो हटाद्यो जी, म्हार छान ओल की बात बैदको प्रगट कर दी जी
सोनी का बेटा म्हारी गली आज्या रे २
म्हार हाथांरा हथफूल तागड़ी हिंरा जड़द रे
नवल बनी कुण निरखलो ए २ थारो बनो बस परदेश तागड़ी कुण निरख लो ए
डाकिया म्हारी गली आजा रे २ सोनी को बोल्यो बोल डाकीया कागद लेज्या रे
नवल बनी धीरज खखो ए २ चतर बनी धीरज राखो ए
थार खीण खामक घाघर पर हिरां की तागड़ी आय निरखांला ए
मोडी का बेटा म्हारी गली आज्या रे, म्हारी आरी तारी की चूनड़ी में ओम लिखद रे ।
नवल बनी कुण निरखलो ए २ थारो बनो बस परदेश चूनड़ी कुण निरखलो ए
डाकिया म्हारी गली आजा रे २ मोडीको बोल्यो बोल डाकिया कागद लेज्या रे
नवल बनी धीरज राखी ए २ थार गोर बदन पर तारां की चुनड़ी आय निरखांला ए
आम पर कीड़ी चढ़ गई जी २ कोई रंग पर चढ़ गया दाम चुनड़ी मंहगी हो गई जी नवल बनी सेठा कोlलड़को,गोर बदन पर आव पसीनों ढुलवादयो पंखो