Ganpat Ne Pratham Manawa

।। श्री गणेश वन्दना ।।

(तर्ज-खाटू को श्याम रंगीलो रे…)
गणपत न प्रथम मनावां जी, गणपत न ।।टेर।।
रिद्वि सिद्धि लेकर आवो जी गजानन्द, आवो जी गजानन्द बैठो जी गजानन्द, चरमां में धौक लगावां जी गणपत न ।।१।।
अन्न धन स भरद्द्यो भण्डारो, भरो भण्डारो देवां भरो भण्डारो, मन स ध्यान लगावां जी, गणपत न ।।२।।
पग मँ थार घुँघरू बांधकर, घुँघरू बांधकर देवां घूँघरू बांधकर, कीर्त्तन में नाच नचावां जी, गणपत न ।।३।।
न्हाय धोय कर करां आरती, करां आरती देवां करां आरती, ‘बनवारी’चॅवर दुलावा जी, गणपत न ।।४।।

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