लाल लंगोटो हाथ में घोटो, “थारी जय हो’- पवन कुमार। वारी जाऊ बालाजी।।
सालासर थारों देवरो, थारे नोबत बाजे द्वार, वारी जाऊ..
चैत सुदी पूनम को मेलो, थारे आवे भगत अपार, वारी जाऊ.
गढ़ झोड़ा की जात झडुला, देवे लाखों ही नर नार, वारी जाऊ…
ध्वजा नारियल चढ़े चूरमों, कोई सिर पर छत्र हजार, वारी जाऊ..
घर-घर थारी ज्योत जगे है, थारा भक्त करै जय जयकार, वारी जाऊ….
घृत सिन्दूर चढ़ावै थारै, कोई मंगल और शनिवार, वारी जाऊ..
भक्ता का थे कारज सारो, थारी महिमा अपरम्पार, वारी जाऊ…
भक्तो की विनती बाबा, म्हारो बेड़ो लगा दिज्यो पार, वारी जाऊ