Paryushan Yah Parv Mahan,

(तर्ज : मेहंदी रची थारै)

पर्युषण यह पर्व महान्, करते हम दिल से सम्मान।
 छाई अजब बहार हो, हर घर घर में।
१. चौरासी के चक्कर में, हम सबने जन्म किए कितने । 
जन्म मरण की परम्परा में, सहन वेदना की हमने।
 अब तो मिला किनारा है, श्री जिन धर्म सहारा है।
 जीवन की पतवार हो ॥
२. महावीर का शासन पाया, किस्मत तेज हमारी है। 
आत्मा से परमात्मा बनने की चर्या सुखकारी है। 
कर्मों के बन्धन तोड़ें, आत्मा से रिश्ता जोड़ें 
समता का विस्तार हो ॥
३. पर्युषण का पर्व सभी में, मैत्री भाव जगाता है। 
अपने तुल्य सभी जीवों को समझें तत्व बताता है। 
महावीर प्रभु का संदेश, मिट जाएंगे सब संक्लेश। 
बरसे अमृत धार हो ॥

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