सूंड सुंडाला,दुंद दुदांला मस्तक मोटा कांन ,
गणपति देव बड़ा बलवान -2
करता हूं गुणगान में तेरा देवो मुझको ज्ञान ,
गणपति देव बड़े बलवान- गणपति देव बड़े बलवान
जो गणपति जी को प्रथम मना ता,
उसका सारा दुख मिट जाता ,
रिद्धि सिद्धि सुख संपति पाता ,भव से बेड़ा पार उतरता, नैया मेरी पार करो मै तेरा लगाऊं ध्यान ,गणपति देव बड़े बलवान गणपति देव बड़े बलवान।
पार्वती जी के पुत्र हो प्यारे, सारे जग के तुम रखवारे, भोलेनाथ है पिता तुम्हारे, सूर्य चंद्रमा मस्तक धारे ।मेरा सारा दुख मिट जावे देवो यही वरदान।
रिद्धि सिद्धि तेरे संग सोहे मुंसे से की सवारी मन को मोहे,
तेरी दया जिस पर हो जावे उसका दुख सुख में मिल जावे,
माला जपु में तेरी गणपति करूं तेरा गुणगान, गणपति देव बड़ा बलवान।
अन्न धन् में प्रभु बरकत तुम हो,विद्या में तुम बड़े निपुणहो,
प्रथम सभी में तुम ही बने हो,नाम गजानन पा ही गये हो ,
दूर करो प्रभु कष्ट हमारा देवों के दया निधानं ,गणपति देव बड़े बलवान, गणपति देव बड़े बलवान —