(तर्ज : लारी लप्पां)
फूल भी न मांगती, ये हार भी न मांगती, माँ तो बस भक्तों का, प्यार मांगती, बोलो जय माता दी ।।
ओसियां के मन्दिर में धाम मेरी माई का, जग है दिवाना मैय्या, तेरी संकलाई का, चढ़ावा भी न मांगती, दिखावा भी न मांगती ।। माँ तो
श्रद्धा से बुलावोगे तो, दौड़ी-दौड़ी आयेगी, अपने प्यारे भक्तो की, लाज बचायेगी, पूजा भी ना मांगती ये, पाठ भी न मांगती ।। माँ तो
ओसियां वाली मैय्या की तो बात निराली है बिना मांगे दे दे ये तो, ऐसी मेहरां वाली है धुप भी ना मांगती ये, दीप भी मांगती माँ तो
ऊंचे-ऊचे पर्वतों पर, मेरी माँ का डेरा है, गम भरी रातों में ये, करती सवेरा है, प्रेत को पछाड़ती ये, दैत्य को है मारती, मेरी माँ तो भक्तों के, कष्ट काटती ।।