(तर्ज : बाईसा रा बीरा)
जगदम्बे थे तो आकर ओढ़ो ए, थारा सेवक ल्याया मां, तारा री चुनड़ी।
सुहागण मिल, चाव से बांधी ए, श्रद्धा क रंग में रंगाई चुनड़ी ।।1।।
सुर तांरो झीणों, पोत मंगायो ए, मनड़े की पेटी म, आ आई चुनड़ी ।।2।।
आशा का तारा, खूब लगाया ए, मोती की लुमा, लगाई चुनड़ी ।।3।।
मां सांचा तारा साचां ही गोटो ए, म्हानै प्यारी लागै मां तारा री चुनड़ी ।।411
चुनडी का तारा चमचम चमके ए, म्हारों मनड़ों हर लीन्यों, तारा री चुनड़ी 11511
मां टाबर गावे, चुनड़ी उढ़ावे ए, थे आकर ओढ़ो मां, तारा री चुनड़ी ।।6।।
मां बेटा गावे, बेटी उढ़ावे ए,