(लय- ये गोटे दार लहंगा)
हे गोटेदार चुनरी आजा माँ ओढ के मेरे घर आना मैंया मंदिर को छोड़ के ,
राम भी आये मैया लक्ष्मण भी आये सीताभी आयी मैय्या कुटिया को छोड़ के
कृष्ण भी आये मैया राधा भी आयी
ग्वाले भी आये मैया गायों को छोड़ के
शंकर भी आये मैया गणपति भी आये,गोरा भी आई पर्वत को छोड़के
ब्रह्मा भी आये मैया,विष्णु भी आये,लक्ष्मी भी आयी मैया सागर को छोड़ के