गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ।
मंत्र के फायदे ॐ
गायत्री मंत्र बहुत ही चमत्कारी और शक्तिशाली माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक इस मंत्र के 24 अक्षर 24 महाशक्तियों के प्रतीक होकर शक्ति बीज हैं। वेदों में गायत्री शक्ति ही प्राण, आयु, शक्ति, तेज, कीर्ति और धन देने वाली मानी गई है। यही वजह है कि गायत्री मंत्र को महामन्त्र पुकारा जाता है, जो शरीर की कई शक्तियों को जाग्रत करता है, जिससे उपासक ऊर्जावान, दीर्घ और निरोगी जीवन प्राप्त करता है।
।। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ।।
भावार्थ:- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक,
सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें । वह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे ।
गायत्री मंत्र
॥ ओ३म् ॥ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ यजु० ३६
शब्दार्थ
ओ३म
सबकी रक्षा करने वाला
भूः
जो सब जगत् के जीवन का आधार, प्राण से भी प्रिय और स्वयंभू है।
भुवः
जो सब दुःखों से रहित, जिसके संग से जीव सब दुःखों से छूट जाते हैं।
स्वः
सवितुः देवस्य
जो नानाविध जगत् में व्यापक होके सबका धारण करता है।
जो सब जगत् का उत्पादक और सब ऐश्वर्य का दाता है।
जो सब सुखों का देनेहारा और जिसकी प्राप्ति की कामना सब
वरेण्यम्
करते हैं।
भर्गः
जो स्वीकार करने योग्य अतिश्रेष्ठ
शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्मस्वरूप है।
तत्
धीमहि
उसी परमात्मा के स्वरूप को हम लोग
धारण करें। किस प्रयोजन के लिये कि
यः
जो सविता देव परमात्मा
नः
धियः
हमारी
प्रचोदयात्
बुद्धियों को
प्रेरणा करे अर्थात् बुरे कामों से छुड़ा कर अच्छे कामों में प्रवृत
करें।
भावार्थ
तूने हमें उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू।
तुझसे ही पाते प्राण हम, दुखियों के कष्ट हरता तू ॥
तेरा महान् तेज है, छाया हुआ सभी स्थान।
सृष्टि की वस्तु-वस्तु में, तू हो रहा है विद्यमान ॥
तेरा ही धरते ध्यान हम, मांगते तेरी दया।
ईश्वर हमारी बुद्धि को, श्रेष्ठ मार्ग पर चला ॥