मोती
नेमिनाथ गिगनारां रा वासी तो, मोती दयो महाराणी जी….२।
कोरी कोरी कुल्हाड़ी में दही रे जमायो तो, गोडे बैठ जीमायो जी….२।
कोई रे करूं धारै कुल्हड़ी रो दही तो, गोडे पर तो न बैठां जी….२।
बागो तो केसरिया सियांयो तो, टोपी लाल गुलाबी जी….२।
कोई रे करूं थारो केसरिया बागो तो, टोपी भी नहीं ओढ़ा जी….२।
कानों में तनें मोती पैरायसू और जड़ाऊं कंठो जी….२।
कॉई रे करूं कानां रा मोती, कंठो भी ना पहरूं जी….२।
हाथ पगां में कड़ी रे कठूलो तो, गलै में मादळियो जी….२।
कोई करूं रे थारो कड़ी रे कठूलो तो, मादलियो तो नहीं पहरा जी….२।
सोने रो तनै चिटियो घड़ाहूं तो, दड़ीया रतन जड़ायूं जी….२।
काई रे करूं चोरी सोने रो चिटियो तो, दडिया तो नहीं खेलां जी….२।
दड़ीया हाथ न खेलां जी….२।
माला शिवा देवी ने रीस ज आई तो, दौय दोय थप्पड़ां मारी जी….२।
हाथा मारी, लातां मारी तो, चूंठीयां चमकाया जी….२।
गीगो रूस बजारां चाल्यो तो, सामै दादोसा मिलग्या जी….२।
हाथ पकड़ गीगे ने ल्याया तो, गीगे नै कुण रूसायो जी….२।
थारो गीगो बहुत हठीलो तो, सोय-सोय जीनसां मांगै जी….२।
हार तोड़’र मोती मांगै जी….२।
महारो गीगो बहुत हठीलो तो, सोय सोय जीनसा देस्यां जी….२।
बुगचो खोल बराबर बैठ्या तो, हार तोड़’र मोती दीन्या जी….२।
मोती ले पिछवाड़े बाया तो, सांझ पड़े उग आया जी….२।
पौफाटी दिन उगण लाग्या तो, लामक-झुमक लाग्या जी….२।
गाडो भर मोत्यां रो लाया तो, ल्यार आंगण में उतारयाजी….२।
ऊरणा भर्रिया, खूणा भर्या तो, भरिया से भण्डारा जी….२।
माता सेवादेवी बांटण लाग्या तो, मन में हरस न मावै जी….२।
ऊपर स्यूं पाडोसण बोली तो, म्हारोड़ी पांती करद्द्योजी….२।
बारै स्यूं भुवा बाई आया तो म्हांरो भी झोळो भरज्यो जी….२।
मै थाने पूछा कंवर कानुड़ा तो आ बुध कुण बताई जी….२।
नेमीनाथ गिरनारां रा वासी तो, आ बुध बां ई बताई जी….२।
जे इंया जाणती म तो हारज पूरों ही देती जी
ना ओ माता लोभ न कीजै ऐ तो, बेला रा बाया मोती नीपजै जी….२।
बेलया रां बाया मोती नीपजै तो, आ वेल्यां भल रे हुइ ज्यों-ज्जी….२।