Mahavir Ki Vani Ko Ghar Ghar Pahuchana Hai

( लय- संसार है इक नदिया (रफ्तार)
महावीर की वाणी को घर-2 पहुंचाना है। 
निर्वाण महोत्सवको जो सफल बनाना है
बलिदान प्रथाओं से धरती भी थर्रायी
 अवतार लिया प्रभु ने ने सुख सरिता लहरायी
 सिखलाई जीव दया उसको न भुलाना है 
जीयो, और जीने दो सद्‌भाव रहे मन मे !
. गिनती के श्वास भरे भरे इस माटी के तनमें 
अभिमान क्रोध माया हमें दूर भगाना है ।
हिंसा प्रतिहिसा से पापों का बोझ बढे 
और सत्य अहिसा ही भव-२ के कष्ट हरे 
नवकार सदा जपना मुक्ति जो पाना है।
हर नगर-२ गूज और गाँव-२ फैले 
तन मन से इक लय में सब बीर की जय बोले
 मित्र मण्डल को हरदम गुण वीर के गाना है।

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