खमत-खामणा गीत
(तर्ज : तावड़ो धीमो पड़ज्या रे….)
– साध्वी श्री राजीमतीजी
चदरिया नयी रंगाई है-२ यदि रागद्वेष रो दाग लागग्यो, क्षमा सफाई है।चदरिया नयी रंगाई है-२
1. हाथ जोड़ सगलां स्यूं म्हांरा, खमत खामणा है।
बिना खमायां गति बिगड़ै, आसूत्र-धारणा है।
समाई खरी कमाई है। कि समता खरी कमाई है।
2. खमत खामणा मनस्यूं करतां, कई जनम सुधरै।
अगर दूसरो करै नहीं, पर लाभ हुवै खुद रै।
घटना भूप उदाई है।
3. जीवा जोणी लख चोरासी, जगत बतायो है।
त्रस जीवां ने बिना समझ यदि कष्ट पूगायो है।
हृदय अनुकम्पा छाई है।
4. स्थावर जीवां री हिंसा तो, कदम कदम होवै।
बांरी पीड़ा नै कुण समझे, वे भीतर में रोवै।
खमिज्यो मन नरमाई है।
5. संघ आपणो है उपकारी, आचारज भारी
जाण अजाण करी आशातन, खमज्यो गणधारी।
गुरु स्यूं बढ़कर कांई है।
6. सुखदाई परिवार तथापि, हुयो कटुक व्यवहार।
नोकर चाकर और पड़ोसी, खमज्यो बारंबार।
मिटे आपस री खाई है।